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Account: किसी वस्तु, सेवा या व्यक्ति विशेष से सम्बन्धित transaction एक स्थान पर छाटकर लिखे जाते है, तो यह उस वस्तु, सेवा या व्यक्ति विशेष का खाता कहलाता है।

Transaction: किसी वस्तु के purchase, sales या लेन-देन या व्यवहार को transaction कहा जाता है। Transaction नकद या उधार हो सकता है।

Assets: सम्पत्तियों में वे सब वस्तुए आती है जो स्थायी या अस्थायी रूप बहुत समय तक व्यापार को चलाने एवं लाभ के लिए प्रयोग की जाती है एवं व्यापार चलाने में सहायता है।

Business: लाभ के उददेश्य से किया गया कार्य व्यापार कहलाता है।

Capital : उस amount या goods को पूंजी कहा जाता है जिसे व्यवसाय का स्वामी व्यवसाय में लगाता है। इसी amount से business start किया जाता है।

Drawing: व्यापार का स्वामी अपने प्रयोग के लिए जो माल या cash business से निकालता है उसे आहरण कहा जाता है।

Goods: जिन वस्तुओं का कोई व्यापारी व्यापार करता है वह उसका माल कहलाता है।

Purchase: व्यापारी जिस माल का व्यापार करता है उसको खरीदने को purchase (क्रय) कहा जाता है।

Purchase Return: Goods को purchase करने के बाद यदि यह जानकारी हो कि goods sample के अनुसार प्राप्त नहीं हुआ है या उसमें कोई दोष (Diffect) है तो जितना goods वापस कर दिया जाता है उसे purchase return कहते है।

Sales: व्यापारी जिस वस्तु का व्यापार करता है उसकी बिक्री को sales (विक्रय) कहा जाता है। यह नकद या उधार दोनो हो सकता है।

Sales Return: बिक्री करने के बाद जो माल वापस आ जाये उसे sales return कहते है।

Stock: जो goods business man के पास account close करने की तिथि पर बिना प्रयोग किया हुआ या बिना बिका हुआ होता है उसे stock कहा जाता है।

Creditors: जिस व्यक्ति, संस्था, फर्म, कम्पनी या निगम आदि को उधार purchase के लिए व्यापारी द्वारा amount देना होता है, वे व्यापारी के creditor होते है।

Debtors: जिस व्यक्ति, संस्था, फर्म, कम्पनी या निगम आदि से उधार दिये हुए माल का मूल्य या amount व्यापारी वसूल करना होता है, वे व्यक्ति, संस्था, फर्म, कम्पनी या निगम उस व्यापारी के Debtor होते है।

 

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